Depreciation And Zero Depreciation Meaning In Hindi

Depreciation Meaning In Hindi – किसी संपत्ति को , अपने व्यापार में प्रयोग करने से , समय बीतने से तथा अप्रचलन आदि के कारण संपत्ति के मूल्य में जो कमी आती है , उसे ह्रास कहा जाता है । आयकर अधिनियम की धारा 32 के अधीन एक करदाता की “ व्यवसाय या पेशे से आय ’ की गणना करते समय उसे संपत्ति पर क्लास की कटौती दी जाती है यदि वह गत वर्ष में उस संपत्ति का स्वामी हो और उसने उस संपत्ति का अपने व्यवसाय में प्रयोग किया हो ।

Conditions For Claiming Depreciation

  • संपत्ति पूर्णतः या अंशतः करदाता के स्वामित्व में होनी चाहिए ।
  • संपत्ति व्यापार या पेशे के उद्देश्य के लिए प्रयोग की जानी चाहिए ।
  • संपत्ति का गत वर्ष में प्रयोग किया होना चाहिए ।
  • ह्रास मूर्त तथा अमूर्त दोनों प्रकार की संपत्तियों पर स्वीकार्य है ।

General Principles Regarding Depreciation

  • ह्रास अपलिखित मूल्य के आधार पर ही अनुमति योग्य है । हालांकि , यदि कोई उपक्रम बिजली को बनाने या वितरण करने के कार्य में लगे हुए है , तो वह सीधी रेखा पद्धति ( Straight line method ) के अनुसार भी ह्रास के लिए दावा कर सकते हैं ।
  • यह ‘ संपत्तियों के ब्लॉक ‘ ( Block of Assets ) पर अनुमति योग्य है , न कि व्यक्तिगत संपत्ति पर ।
  • सरकार की ओर से किसी भी सब्सिडी , अनुदान या प्रतिपूर्ति को घटाने के बाद निर्धारित वास्तविक लागत पर संपत्ति के ब्लॉक का ह्रास अपलिखित मूल्य पद्धति के आधार पर लगाया जाता है ।
  • ह्रास की गणना पिछले वर्ष के अंतिम दिन पर संपत्ति के खंड ( ब्लॉक ) पर अपिलिखित मूल्य पद्धति के आधार पर की जाएगी ।
  • ह्रास की गणना आयकर अधिनियम द्वारा निर्धारित दरों के आधार पर की जाएगी ।
  • गत वर्ष में प्राप्त कोई संपत्ति यदि व्यापार में 180 दिन से कम प्रयोग की जाए तो उस संपत्ति के संबंध में उस गत वर्ष के लिए सामान्य ह्रास का 50 % ह्रास स्वीकृत होता है । परंतु यदि संपत्ति गत वर्ष से ठीक पूर्व के वर्ष में प्राप्त की गई हो और प्रयोग गत वर्ष में करना आरंभ किया हो तो पूरा ह्रास मान्य होगा भले ही संपत्ति गत वर्ष में 180 दिन से कम प्रयोग की गई है ।
  • ह्रास पर कटौती दी जाएगी चाहे कर दाता ने कुल आय की गणना करते समय ह्रास की कटौती का दावा किया था या नहीं ।
  • यदि संपत्ति का अपलिखित मूल्य शून्य हो जाता है , तो ह्रास की कटौती स्वीकार्य नहीं है ।
  • यदि किसी गत वर्ष का ह्रास अशोधित रह जाता है , तो यह भविष्य के वर्षों में तब तक आगे लेकर जाया जाएगा जब तक ह्रास अर्जित आय के विरूद्ध पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता ।
  • सह – स्वामित्व के मामले में , ह्रास उनके स्वामित्व के अनुपात में कटौती योग्य है ।
  • यदि संपत्ति किराया क्रय पद्धति के अंतर्गत क्रय की गई है , तो ह्रास की कटौती क्रेता को दी जाएगी ।

Zero Depreciation

शून्य मूल्यह्रास कवर, जिसे ‘जीरो डीई’ नीति भी कहा जाता है, मूल्यह्रास में फैक्टरिंग के बिना पूर्ण कवरेज प्रदान करता है। इसका मतलब है, यदि आपकी कार टक्कर के बाद क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो आपको बीमाकर्ता से पूरी लागत प्राप्त होगी।

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